Thursday, May 13, 2010

कभी कहा न किसी से - क़मर जलालाबादी

( ऑडीओ - व्हीडीओ सहित )
हि एक अशी गझल आहे जी बर्याच गायकांनी गायली आहे अगदी नूर जहां, गुलाम अली, रुना लैला पासून अनुप जलोटा, आशा भोसले पर्यंत. सुंदर शब्द आणि सुंदर चाली हे वैशिष्ठ्य !
यातली माझी सगळ्यात आवडणारी म्हणजे आशा नि गायलेली !

कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को
न जाने कैसे खबर हो गई ज़माने को

चमन में बर्क़ नहीं छोडती किसी सूरत
तरह-तरह से बनाता हूँ आशियाने को

सुना है ग़ैर की महफ़िल में तुम न जाओगे
कहो तो आज सजा लूँ ग़रीबखाने को

दुआ बहार की माँगी तो इतने फूल खिले
कहीं जगह न मिली मेरे आशियाने को

चमन में जाना तो सय्याद देखकर जाना
अकेला छोडकर आया हूँ आशियाने को

मेरी लहद पे पतँगों का खून होता है
हु़ज़ूर शम्मा ने लाया करें जलाने को

दबा के चल दिये सब क़ब्र में दुआ न सलाम
ज़रा-सी देर में क्या हो गया ज़माने को

अब आगे इसमें तुम्हारा भी नाम आयेगा
जो हुक़्म हो तो यहीं छोड दूँ फ़साने को

'क़मर' ज़रा भी नहीं तुझको खौफ़-ए-रुसवाई
चले हो चाँदनी शब में उन्हे मनाने को

गायक - गुलाम अली


गायक - नूर जहां


गायक - आशा भोसले

( kabhi kaha na kisi se tere fasane ko, na jaane kaise khabar ho gayi zamane ko )

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